आर्य समाज भजनसभी लेख यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी। By Arya Samaj - April 29, 2025 0 17 FacebookTwitterPinterestWhatsApp यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी। यज्ञशिष्ट भोजी,ब्रह्मानन्द भोगी।खुद भर न खा,रहेगा तू पाप बचा ।। १11 सहजतः बांट के खा,स्वाद पा खुद खुद का।सब संग भोग, इन्द्र संग योग ।। २ ।। बन यज्ञ शिष्टाशी,जुड़ ब्रह्म अविनाशी ।लघुतम जीवन,कंजूस न बन ।। ३ ।। Curent posts: सारे जहां के मालिक तेरा ही आसरा है। प्रभु भक्ति में मन को लगाइये सुख के अभिलाषी, प्राणी को भगवान् नेकी के कर्म कमा जा रे क्यों भूल रहा प्राणी यज्ञ जीवन का हमारे श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है। संसार के लोगों से आशा न किया करना एक सहारा नाम का एक बड़े भाग्य से मनुष्य देही मिली है बहुत याद करते है शहीदों को हम।