यज्ञ में जब कभी उसे बुलाओगे
यज्ञ में जब कभी, उसे बुलाओगे
जब भी गाओगे – वेद मन्त्रों से
तुम उसे, उस जगह ही पाओगे
यज्ञ में जब कभी, उसे बुलाओगे
प्रभु कहता है – रोज वेदों में
आशा पूर्ण, मैं यज्ञ में करता हूँ
यज्ञ उत्तम है पूजा, उस के सङ्ग
यज्ञ में आकर ही, उस को पाओगे
यज्ञ में जब कभी, उसे बुलाओगे
जब से त्यागे है – यज्ञ हमने सभी
त्याग कर वो भी हमको बैठा है
यज्ञ पूर्ण करोगे – उसके सभी
तब शान्ति में – वृद्धि पाओगे
यज्ञ में जब कभी, उसे बुलाओगे
सब भुवनों को उसने धारा है
बल देकर हमें संवारा है
चारों वेदों का ज्ञान देके हमें
मोक्ष-मार्ग हमें सुझाया है
प्रभु आज्ञा है वेद उस पर चलो
भव सागर से तर ही जाओगे
यज्ञ में जब कभी, उसे बुलाओगे
रचनाकार :- पूज्य स्वामी राम स्वरूप जी










