यज्ञ जीवन का हमारे,श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है।
यज्ञ जीवन का हमारे,
श्रेष्ठ सुन्दर कर्म है।
यज्ञ का करना कराना,
आर्यों का धर्म है।।1।।
यज्ञ से दिशा हो सुगन्धित,
शान्त हो वातावरण।
यज्ञ से सज्ञान हो,
हो यज्ञ से शुद्धाचरण।।2।।
यज्ञ से हो शुद्ध काया,
व्याधियाँ सब नष्ट हों।
यज्ञ से सुख सम्पदा हों,
दूर सारे कष्ट हों।। 4।।
यज्ञ से दुष्काल मिटते,
यज्ञ से जल-वृष्टि हो।
यज्ञ से धन-धान्य हो,
बहु भांति सुखमय सृष्टि हो।।4।।
यज्ञ है प्रिय मोक्षदाता,
यज्ञ शक्ति अनूप है।
यज्ञमय यह विश्व है,
और विश्व यज्ञ स्वरूप है।।5।।
यज्ञमय अखिलेश ! ऐसी,
आप अनुकम्पा करें।
यज्ञ के प्रति आर्य जनता,
में अमित श्रद्धा भरें।।6।।
यज्ञ-पुण्य-प्रकाश से,
सब पाप-ताप तिमिर हटे,
यज्ञ-नौका से अगम,
संसार सागर को तरें। ।7।।










