दिल में रहता है
(तर्ज – मैं तेरे दर पे आया हूँ कुछ करके जाऊँगा)
वो सब के दिल में रहता है दिल में ही पाओगे।
गर बाहर जाओगे तो धोखा खाओगे।
वो सबके दिल में रहता है…..
१. सृष्टि को बनाता है। और ख़ुद ही चलाता है।
दुनियाँ का रक्षक है। सब का वो दाता है।
उसकी ही माया है। कण कण में समाया है।
यह सब अपने दिल को तुम कब समझाओगे।
वो सबके दिल में रहता है…..
२. तीर्थ पर जाने में। मल मल के नहाने में।
फल फूल चढ़ाने में। ख़ुद को भटकाने में।
कुछ भी न हाथ लगा। और जीवन बीत गया।
तब तलियाँ मल मल के रोते रह जाओगे।
वो सबके दिल में रहता है…..
३. जितने भी प्राणी हैं। सबका मन मन्दिर है।
ईश्वर हर प्राणी के। मन्दिर के अन्दर है।
प्रभु की जो सेवा है। फल मीठा मेवा है।
अनजान ‘पथिक’ समझो वरना पछताओगे।
वो सबके दिल में रहता है…..










