वे अमर रहें जय घोष ही तो उपहार शहीदों का होता।

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वे अमर रहें जय घोष ही तो उपहार शहीदों का होता।

वे अमर रहें जय घोष ही
तो उपहार शहीदों का होता।
श्रद्धांजलि शोक सभा तक ही
बस प्यार शहीदों का होता ॥
प्रिय मातृभूमि की रक्षा हित
जो निज जीवन को वारते हैं।
अरदिल पै सिंह से टूटते हैं
मरते हैं या उनको मारते हैं।।
विजय मुकुट और के बांधता है
संहार शहीदों का होता ॥1॥

अन्तिम श्वासों तक इंच-इंच
भूमि पर जूझा जाता है।
तब राष्ट्र विजयश्री पाता है
वह तिरंगा ध्वज लहराता है।
गौरव गरिमा पर मिट जाना
इकरार शहीदों का होता ॥2॥

बलिदानी पति का शव देखा
पत्नी की आँख चमक उठी।
पति वीर गति को प्राप्त हुआ
इतना कह करके सिसक उठी॥
नन्हें सुत सुता के आंसू ही
श्रृंगार शहीदों का होता ॥3॥

है धन्य-धन्य जननी माता
जिस गोद में ऐसे सुत पलते।
आने पै भयंकर आँधी भी
जो वीर दिवाकर से जलते ॥
स्वतंत्रता कायम रखना
उपकार शहीदों का होता ॥4॥

कल देश धर्म की बातें थी
जब खून बहा योद्धाओं का।
फिर बने धर्म निपेक्ष सभी
आता समय देख चुनावों का ॥
बस धर्म हीन नीति तज दो
यही आभार शहीदों का होता ॥5॥

बेशर्म नीच एक निर्लज्जा
कह गयी उग्रवादी जिनको।
किस तरह जूझते दुश्मन से
जरा देख तो सरहद पर उनको॥
कर्मठ जाँ वतन पै देना ही
आधार शहीदों का होता॥6॥

सीमा पर शहीद होने पर
जब बेटे का शव एक माँ
देखती है तो यही कहती है-