गायत्री महिमा
वरदायिनी हे गायत्री माता।
गुणगान तेरे संसार गाता।
१. रक्षा करे प्रभु प्राणों से प्यारा।
दुःख दर्द नाशक दुनियाँ से न्यारा।
मानव प्रभु से ही सुख चैन पाता।
वरदायिनी हे गायत्री……
२. सारे जगत् को जिसने रचाया।
है वरण के योग्य तूने बताया।
आवागमन का फ़िकर छूट जाता।
वरदायिनी हे गायत्री…..
३. उस देव का शुद्धतम तेज धारें।
जीवन की हर एक नस में उतारें।
ऐसी कृपा आप कर दे विधाता।
वरदायिनी हे गायत्री……
४. ईश्वर हमें नेक रस्ता दिखावे।
सन्मार्ग पर बुद्धियों को चलावे।
सज्ञान देकर तमस् को मिटाता।
वरदायिनी हे गायत्री……
५. आयु प्रजा प्राण पशु धन दिलावे ।
कीर्ति द्रविण ब्रह्मवर्चस् को पावे ।
माँ आपकी शुभ शरण में जो आता।
वरदायिनी हे गायत्री…….
६. तू पावनी सर्व कल्याणकारी।
पावन करे सब को महिमा तुम्हारी।
हम को ‘पथिक’ नाम तेरा सुहाता।
वरदायिनी हे गायत्री……










