वही तर गया प्रभु का जिसने लिया सहारा

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वही तर गया प्रभु का जिसने लिया सहारा

वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा
भव से हो पार कश्ती
मिल जाता है किनारा

भटके से क्या हो दर दर
तेरा मीत तेरे अन्दर
काशी गया में क्यों तू
फिरता है मारा मारा
वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा

मन का तू अपने दर्पण
कर साफ होगा दर्शन
प्रियतम नजर में आए
नहीं दूर है वो प्यारा
वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा

मत पूछ वो कहाँ है
हर जर्रे में रमा है
हर गुंच गुल कली में
उसका ही है नजारा
वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा

वैसे तो हर जगह है
हर जर्रे में रमा है
वैसे तो हर जगह है
तेरे दिल में भी बसा है
जब इश्क होगा “कर्मठ”
मिलना तभी गंवारा
वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा

वही तर गया प्रभु का
जिसने लिया सहारा
भव से हो पार कश्ती
मिल जाता है किनारा