वही चांद सूरज वही हैं सितारे
वही चांद सूरज वही हैं सितारे,
मगर तुम कहां हो दयानन्द हमारे।।
तू आर्य जगत का था रत्न प्यारा,
था निर्भर तुम्हीं पर ये भारत हमारा।
दुःखी सारे मानव हैं बिना तुम्हारे ।।
तू था निर्बलों के बलों का सहारा,
अछूतों को तूने ही आकर उभारा ।।
तुझे आज ये प्यारा भारत पुकारे ।।
रही फैल वेदों की ज्योति जगत में,
मची खलबली दम्मियों के कुमत में।
चले धर्म नैया लगा कर किनारे ।।
भटकते थे अज्ञान अंधकार में हम,
विचरते बिना ज्ञान संसार में हम ।
थे दुःखियों के दुःख में तुम ही सहारे ।।
तेरी चर्चा हर मुल्क हर देश में है,
तू मानव नहीं देवता वेश में है।
तेरे जैसा कोई नजर न हमारे ।।
दिया दान जीवन का घातक को तूने,
अरे! शान्त काटा है पातक को तूने
दया कर गया तू दयानन्द प्यारे ।।










