वेद ही ईश्वरीय वाणी है।

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वेद ही ईश्वरीय वाणी है।

वेद ही ईश्वरीय वाणी है।
सर्व संसार को कल्याणी है ॥
वर्द्धिनी भौतिकात्म-शक्ति की है,
शिक्षिका ज्ञान, कर्म, भक्ति की है।
ये न मिथ्या कपट कहानी है,
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ॥

जितने प्रचलित हैं मत ये नूतन हैं।
साक्षी हिजरी व ईसवी सन् हैं ।
वेद की सभ्यता पुरानी है।
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ॥

पाप सन्ताप क्षय हुए उनके ।
जीवन आनन्द-मय हुए उनके ॥
वेद-शिक्षा जिन्होंने मानी है।
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ॥

आर्यो ! जग सुखी बनाने को,
असत्-अज्ञान-तम मिटाने को,
वेद की ज्योति जगमगानी है।
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ॥

पढ़ो ऋषिराज का ‘सत्यार्थप्रकाश’
वेद प्रति श्रद्धा, भ्रान्ति होगी विनाश ।
जो है निर्भान्त वो ही ज्ञानी है।
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ॥

वेद-स्वाध्याय ‘प्रकाशार्य’ करो
वेद-अनुकूल ही सब कार्य करो
मुक्ति त्रयताप से जो पानी है।
वेद ही ईश्वरीय वाणी है ।।