विवेकी नर दुखों में भी घबराया नहीं करते।।

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विवेकी नर दुखों में भी घबराया नहीं करते।।

स्वरः ख्यालो में किसी के

विवेकी नर दुखों में भी
घबराया नहीं करते।।
अगन की हर तपन में
वो मुरझाया नही करते।।
जंमी में पडके ही दाने
गुलो गुलजार होते है,
घुणों के ढेर भी हरगिज
उगजाया नहीं करते।।१।।

शिखर पे जाने वाले हर
कदम गिनते नही मुड़कर,
वो आंधी और तुफानों से
रूक जाया नही करते।। २।।

शिषिर की कपकपी से
कापना आता नही जिनको,
अपनी चाहत के पत्तों को
बिखराया नहीं करते।। ३।।

जिन्हें आदत है जीने की
धूप ओर छांव सहने की,
सुरेन्द्र बात ही बातों में मर
जाया नही करते ।।४।।