विनती मेरी को सुनलो हे जगत्राता
विनती मेरी को सुनलो हे जगत्राता,
दुखिया हूँ- निःसहाय हूँ,
मुझे दे दो सहारा।
दयालु नाम तुम्हारा,
बताता है जग सारा,
दुखों से दो छुटकारा।। टेक ।।
करूणा सिन्धु करूणा कर दो,
याचक की झोली को भर दो
धर्म कर्म सदज्ञान का वर दो,
हर दो तिमिर विधाता ।।
दुखिया हूँ……
जीवन में जो भी हलचल है,
यह सब कर्मों का ही फल है।
नियम आपका नित्य अटल है,
निर्बल है बल पाता।
दुखिया हूँ……….
एषणाओं से दे दो विरक्ति,
विषयों में ना हो आसक्ति।
देश धर्म जाति की भक्ति,
शक्ति मैं चाहता हूँ दाता ।।
दुखियां हूँ………
न्यायकारी में न्याय चाहता हूँ,
परोपकारी मैं उपाय चाहता हूँ
जीवन शुभ अध्याय चाहता हूँ,
राय चाहता हूँ “प्रेमी” भ्राता ।।
दुखिया हूँ………..










