विनती है ये मेरी भगवन

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विनती है ये मेरी भगवन

विनती है ये मेरी भगवन
जिसमें राग द्वेष मोह ना हो
ऐसा कर दो मेरा जीवन विनती…..

ध्यान समाधि लगाके “सारंग”-3
चाहता है तेरे करने दर्शन विनती है……

शरण में आके तेरी अब तो-3
प्रसन्नचित् है मेरा ये मन विनती है……

झोली खाली है ये मेरी-3
भक्ति का इसमें भर दो धन विनती है……