वेदपथ पर चलो पढ़ो शास्त्र उपनिषद ।

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वेदपथ पर चलो पढ़ो शास्त्र उपनिषद ।

वेदपथ पर चलो पढ़ो
शास्त्र उपनिषद ।
शान्ति-सुख के स्रोत
तुम्हें मिल जाएंगे ।। १।।

आज सूखे पड़े हैं
जो मन के सुमन।
ज्ञानगंगा सलिल से
वे खिल जाएंगे ।। २ ।।

तन में बल वायु सा
अग्नि सा तेज हो।
शत्रुओं के सुदृढ़
पांव हिल जाएंगे ।। ३ ।।

आर्यवीरों से जिस
दिन सजेगी धरा।
दम्भ पाखण्ड जग
से निकल जाएंगे ।। ४ ।।