वेदों का अमृत पिला गया ऐसे ऋषि को याद कर

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वेदों का अमृत पिला गया ऐसे ऋषि को याद कर

तर्ज: वो तो चले गए हैं दिल

वेदों का अमृत पिला गया ऐसे ऋषि को याद कर

सोतों को जो जगा गया ऐसे ऋषि को याद कर ॥

छोड़ा जिन्होंने धर्म कर्म आए दयानन्द की शरण

संध्या हवन सिखा गया ऐसे ऋषि को याद कर ॥

लाखों बचे मँझधार से ऋषि लाया किनारे उबार के

अज्ञान भ्रम मिटा गया ऐसे ऋषि को याद कर ॥

आर्य बँधे दस नियमों से ऋषि की अटूट डोर से

निष्काम कर्म सिखा गया ऐसे ऋषि को याद कर ॥

अनमिट लिखी कहानियाँ शहीदों ने अपने खून से

खून का रंग खिला गया ऐसे ऋषि को याद कर ॥

काबिल ‘ललित’ तू इतना कहाँ जो लिख पाए कह पाए तेरी जुबाँ

जिसकी मिसाल कहीं न आज ऐसे ऋषि को याद कर ॥