वेद-शरण से, मन्त्र मनन से भवसागर तरें

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वेद-शरण से, मन्त्र मनन से भवसागर तरें

वेद-शरण से, मन्त्र मनन से
भवसागर तरें
वेदानुकूल आचरण से
सत्य उजागर करें
वेद-शरण से, मन्त्र मनन से

जो कुछ मन्त्रों से सुनते हैं
उपदेश ग्रहण करें
मद, क्रोध, हिन्सा, द्वेष आदि
भूले से भी ना करें
लालच के वश ना मोहित करें
भाई को भाई समझें
वेदानुकूल आचरण से
सत्य उजागर करें
वेद-शरण से, मन्त्र मनन से

हिन्सन-विमोहन का करें ना दोहन
आश्रय देवों का लें
ना हो उत्पन्न क्रोध और द्वेष
व्यर्थ न स्वार्थ करें
देवों का आञ्चल थाम कर
पुरुषार्थ-पथ चलें
वेदानुकूल आचरण से
सत्य उजागर करें
वेद-शरण से, मन्त्र मनन से

हे देवों ! हम समझ गए हैं
वेदों के भाव निष्काम
वेदानुकूल आचरण से
पाना है मोक्ष धाम
पुरुषार्थ राह दिखाई
धन्यवाद तुम्हारा करें
वेदानुकूल आचरण से
सत्य उजागर करें
वेद-शरण से, मन्त्र मनन से
भवसागर तरें
वेदानुकूल आचरण से
सत्य उजागर करें
वेद-शरण से, मन्त्र मनन से