वेद सभ्यता और शिक्षा को मिला दिया धूल में।

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वेद सभ्यता और शिक्षा को मिला दिया धूल में।

वेद सभ्यता और शिक्षा को मिला दिया धूल में।
आज दिन दे रहे आर्य कालेज और स्कूल में।।
उल्टे कर्म सिखाकर-।। १ ।।

प्रधान जी अपने लडके को बी.ए. पास कराते हैं।
शिखा सूत्र दिये त्याग नौकरी खातिर धक्के खाते हैं।।
ये पैंट और हैट सजाकर-।। २ ।।

कोषाध्यक्ष मंत्री की लडकी भी कालेज को चलती है।
दो चोटी नंगा सिर करके घर से बाहर निकलती है।।
हां लेडी इन्हें बनाकर-।। ३।।

मद्य,मांस,चाय,अण्डे,बिस्कुट सेवन करें नमस्ते भी।
सांग सिनेमा दिखा कुटुम्ब को जा रहे उल्टे रस्ते भी।।
लाज शर्म बिसराकर -।।४।।

ऊत भूत डोरी गढ्डे कर आर्य धर्म की हानी की।
ईंट और पत्थर पूजे नारी मन्त्री और प्रधान की।।
वो पांचों यज्ञ भुलाकर-।। ५ ।।

नकली जात पात का बंधन ये भी इनसे टूटा ना।
झूठे नाविल गंदा साहित्य पढना इनसे छूटा ना।
एक बुद्ध की कथा सुनाकर- ।। ६ ।।

सिगरेट,बिडी,हुक्का,,पीवै फिर वो ही उपदेश करें।
समझा नहीं वैदिक सिद्धान्त को झूठी बातें पेश करो।।
ग्रामों में जा जाकर – ।।७ ।।


नहीं आर्य बन सकता है सत्यार्थ प्रकाश बिना।
कहे “भीष्म्” सत्यार्थ समझें कहां योग अभ्यास बिना।।
बेकार भजन गा गाकर-।। ८ ।।