वेद के मार्ग से तू जो बचके चला।

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वेद के मार्ग से तू जो बचके चला।

तर्ज – आप यूँ ही अगर हमसे……..

वेद के मार्ग से तू जो बचके चला।
देखना एक दिन बन्दे पछतायेगा।।
हार मिलके रहेगी तुझे देखना।
रे मुसाफिर तेरा दिल ये घबरायेगा।

वेद पढ़कर मिलेगा
तुझे ईश्वर ये चलेगा पता है
कहाँ उसका घर क्यूँ भटकता
तू फिरता अरे ओ “सचिन”
वेद पढ़कर तू सद्ज्ञान को पायेगा
वेद के मार्ग……

राह पथरीली मुश्किल है
लम्बी बड़ी और समस्यायें
मंजिल के आगे खड़ी पर चलना
संभलकर के ड़िगना नहीं पास
मंज़िल के अपनी चला जायेगा
वेद के मार्ग……

जिस पथ से है तेरा अरे वास्ता
वो दयानन्द बता के गया रास्ता
मान ले बात वेदों की नादाँ
बशर फल अवश्य ही
तू मोक्ष का खायेगा
वेद के मार्ग..