वेद ही जग में हमारा, ज्योति जीवन-सार है।
वेद ही जग में हमारा,
ज्योति जीवन-सार है।
वेद ही सर्वस्व प्यारा,
पूज्य प्राणाधार है।। टेक।।
सत्य विद्या का विधाता,
ज्ञान का गुरु गेय है।
मानवों का मुक्तिदाता,
धर्मधी का ध्येय है।
वेद ही परमेश प्रभु का,
प्रेम-पारावार है।।1।।
वेद ही जग में हमारा………
ब्रह्मकुल का देवता है,
राजकुल रक्षक रहा।
वैश्य-वंश विभूषिता है,
शूद्र-कुल-स्वामी महा।
वेद ही वर्णाश्रमों का,
आदि है आधार है।।2।।
वेद ही जग में हमारा……..
श्रावणी का श्रेष्ठ उत्सव,
पुण्य पावन पर्व है।
वेद-व्रत-स्वाध्याय वैभव,
आज ही सुख सर्व है।
वेदपाठी विप्रगण का,
दिव्य दिन दातार है।।3।।
वेद ही जग में हमारा……
वेद का पाठन-पठन हो,
वेद-वाद विवाद हो।
आर्य जन का आज से,
व्रत विश्व वेद-प्रचार है।।4।।
वेद ही जग में हमारा……..
विश्व भर को आर्य करना,
वेद का संदेश है।
मृत्यु से किंचित न करना,
ईश का आदेश है।
सृष्टि-सागर में हमारा,
वेद ही पवार है।।5।।
वेद ही जग में हमारा…….
रोज रोज सरोज सम,
श्रुति ‘सूर्य से खिलते रहें।
वेद-चंद्र चकोर हम,
द्युति मोद से मिलते रहें।
वेद ही स्वामी सखा सब,
वेद ही परिवार है।।6।।
वेद ही जग में हमारा……










