वैदिक धर्म की जय हो
वैदिक धर्म की जय हो-2
भगवान की कृपा से संसार प्रेममय हो।।
मिल एक स्वर में बोलें,
सब वेद की ऋचाएं पृथ्वी
आकाश गूंजें-गूंजें सभी दिशाएं।
वेदों की ज्योत्सना से त्रिभुवन
प्रकाशमय हो…. ।।
घर-2 में यज्ञ होवे,
सुख वृष्टि ही सदा हो,
नर-नार स्वस्थ सारे,
धन-धान्य संपदा हो ।
आरोग्यता विराजे प्रत्येक
ताप क्षय हो…..।।
सद्भावना परस्पर ऊंचा
चरित्र होवे मन शुद्ध और
निर्मल बुद्धि पवित्र होवे।
सबके लिए निरन्तर सब
ओर से अभय हो…..।।
वर्णाश्रमी व्यवस्था स्वाधीन राज में हो,
गुण कर्म की महत्ता मानव समाज में हो।
जिससे सौभाग्य सबका फिर से
पथिक उदय हो…. ।।










