उठ कर ले भजन भगवान् का
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है
जन्म मिला तुझे अनमोल हीरा,
माटी में क्यों खो दिया,
जिस मार्ग से जाना तुझे था,
उसी में काँटों को बो दिया
यह न जाना कि झूठा सन्सार है, (1)
और झूठी यह मौज बहार है,
यह दुनिया तो मेला चन्द रोज़ का,
आखिर तो यहाँ अन्धकार है
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है
इस दुनिया की मोह ममता में,
तूने प्रभु को भुला दिया,
विषय विकारों बद्-कर्मों में,
जीवन सारा लुटा दिया
जिस नैया में तू सवार है,
वही नैया तेरी मंझधार है,
बिना भजन धर्म पतवार के,
कभी होगा न बेडा पार है
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है
भूखा मरे कोई प्यासा मरे पर,
तुझको किसी की फ़िक्र नहीं,
सत्य-अहिंसा दया-धर्म का,
तेरी ज़ुबान पर ज़िक्र नहीं
सारी बीती उम्र यूँ ही झूठ में,
बेईमानी से किया व्यापार है,
जरा मन में तू अपने सोच ले,
तूने कौन सा किया उपकार है
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है
पाप करो चाहे करो भलाई,
ऐसा कभी नहीं हो सकता,
औरों को दुःख देगा तो खुद भी,
सुख से कभी नहीं सो सकता
जैसा बोएगा वैसा काट ले,
यही कर्मो का खुला बाजार है,
जिन कर्मों के जीते जीत है,
उन कर्मों के हारे हार है
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है
दुनिया में रहकर जीते जो मन को,
वो प्राणी सबसे बलवान् ,
छोड़ दे तू बदियों को नाहक,
इसमें है तेरा कल्याण
भव सागर से भी तर जाएगा,
गर तेरा प्रभु से सच्चा प्यार है,
जो भक्ति की आँखों से देखता,
उसे प्रीतम का होता दीदार है
उठ कर ले भजन भगवान् का,
तेरे जीवन का तो यही सार है
बिना बन्दगी भजन भगवान् के,
तेरा जीवन यूँ ही बेकार है










