उठ प्रातः समय मन मन्दिर में, क्यूँ दीप जलाना भूल गए
तर्ज: सपने में सजन से दो बातें
उठ प्रातः समय मन मन्दिर में, क्यूँ दीप जलाना भूल गए
जिस दाता ने भण्डार भरे, ऋण उसका चुकाना भूल गए ॥
उठ प्रातः…
मन में तृष्णाएँ जागीं थीं, जीवन की दौड़ में आगे थी
भटकाया उलझी राहों ने, सत्कर्म कमाना भूल गए ॥
जिस दाता ने…
तेरी याद तो दुःख में आई थी, और सुख में याद भुलाई थी
सुख ने उलझाया पापों में, और पुण्य कमाना भूल गए ॥
जिस दाता ने…
सारा जीवन तो खो बैठे, दुःख दर्द रोग सब ले बैठे
क्या लाभ है अब पछताने से, जब वक्त की कीमत भूल गए ॥
जिस दाता ने…
(तृष्णा) प्यास, अभिलाषा, लिप्सा, लोभ, लालच










