शिक्षा
उठ नाम सिमर,
मत सोय रहो,
मन अन्त समय पछतायेगा।
जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया,
फिर हाथ कुछ न आयेगा ।।
हास विलास में बीती उमरिया,
बहुत गयी रही थोड़ी उमरिया।
बुझ गया दीपक जल गई बाती,
कोई राह तुझको दिखायेगा।।
उठ नाम सिमर मत सोय रहो…..
पाप बोझ से भर ली गगरिया,
जाना रे तुझ को दूर नगरिया।
जैसा करेगा वैसा भरेगा,
कोई साथ न तेरा निभाएगा।।
उठ नाम सिमर मत सोय रहो…
ओ३म नाम धन भर लो खजाना।
रहना नहीं ये देश वीराना।।
प्रभु के चाकर होकर रहियो।
भव सागर से तर जायेगा।।
उठ नाम सिमर मत सोय रहो….










