चेतावनी
उसके चरणों में,
तो हुआ ध्यान तुम्हारा ही नहीं।
तुझको धन प्यारा है,
भगवान तो प्यारा ही नहीं।।
क्यों सुनेगा भला,
परमात्मा आवाज तेरी।
तूने उसको कभी,
दिल से तो पुकारा ही नहीं।।
उसके चरणों में, तो हुआ ध्यान…….
क्या हुआ कितने ही,
मैदान अगर मार लिए।
अपने इस मन को तो,
अब तलक तूने मारा ही नहीं।।
उसके चरणों में, तो हुआ ध्यान……
यह हवा आज तो,
उलटी ही जमाने में चली।
भले इंसान का,
दुनियाँ में गुजारा ही नहीं।।
उसके चरणों में, तो हुआ ध्यान……
वह क्या उस पार,
किनारे पे भला पहुँचेगा।
जिसने मझधार में,
कश्ती को उतारा ही नहीं।।
उसके चरणों में, तो हुआ ध्यान…..
तू है जिसने कभी,
उसको ना ‘पथिक’ याद किया।
वह है जिस ने कभी,
तुझको तो बिसारा ही नहीं।।
उसके चरणों में, तो हुआ ध्यान…….










