उस ईश्वर की न्याय व्यवस्था
उस ईश्वर की न्याय व्यवस्था,
काम बांट दिए सारे।
मिलजुल कर इस तन को पालें,
सारे अंग हमारे।। टेक।।
आंख देखती नाक सूंघता,
सुनता कान बताया।
छूने का सब ज्ञान भान,
त्वचा से ही करवाया।
जीभ चटोरी से बुलवाया,
थप्पड़ गाल बेचारे।।1।।
खिला रहा मुख सारा भोजन,
लेता पेट पचाय।
रक्षा करते हाथ हमेशा,
पग लेकर पहुंचाय।
पुष्ट गात्र हो जाय राय,
सब एक दूजे के सहारे।।2।।
जितने भी अपशिष्ट पदार्थ,
इंद्री उनको दूर करें।
पीड़ा हो जब किसी अंग में,
सहाय सभी भरपूर करें ।
आपस में जो कसूर करें,
संकट से कौन उबारे ।।3।।
कह मनहर कविराय राय,
सब अपनी एक बनाओ ।
सभ्य सुशील समझ समता,
समदर्शी नेक बनाओ।
सबकी मिल मिल टेक बनाओ,
ज्यों सूरज चांद सितारे।।4।।










