ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों की

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ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों की

ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों की,
चट्टानों को तोड़ के।
चढ़ जाते हैं आर्य बहादुर,
दौड़-दौड़ के ।।

चार वेद मनुस्मृति,
ऋषियों का ये कहना है।
सीने ऊपर चोट लेना,
वीरों का ये गहना है।।

रहना अगर शान से,
जा दुश्मन को मरोड़ दे।
टूटे हुए आइनों के
टुकड़ें जोड़-जोड़ के ।।
ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों……।।