उदयभान का किला कोंडाणा क्यातू निशानी भूल गई
उदयभान का किला कोंडाणा क्या
तू निशानी भूल गई,
मुझे करा कर याद मात क्यों
इसकी कहानी भूल गई। टेक ।।
मुझे साथ लेकर रोजाना
छत पर आया करती थी,
तेरे बड़ों का किला लाल
यह यह मुझे बताया करती थी,
कथा सुनाया करती थी कर
याद जबानी भूल गई।।1।।
तू हाथ उठाकर कहती थी और
सुना करूं था हंस-हंस में,
तुझे जोश आ जाता था
क्या बात आज मां दिन दस में,
पहले की तरह नस-नस में,
बिजली दौड़ानी भूल गई।।2।।
किले की ओर लखा करके
कुछ कष्ट बदन पर सहती थी,
है आज वहां मुस्लिम झंडा
जहां ध्वजा ओम की रहती थी,
तू कहती थी यह उदय भान ने की
नादानी भूल गई।।3।।
शोभाराम तेरी बातों को
सुन-सुनकर हो गया हैरान,
ऐसी छोटी बातों का क्यों
माता जी करती हो ध्यान,
जोशीला व्याख्यान आंख से
बहाके पानी भूल गई।।4।।










