तूने खूब रचा भगवान, खिलौना माटी का।
तूने खूब रचा भगवान,
खिलौना माटी का।
जिसे कोई न सका पहचान,
खिलौना माटी का।।
पैर दिये तीरथ करने को,
हाथ दिये कर दान।
खिलौना माटी का……..
कान दिये सुन वेद वाणी को,
आंख दिये पढ़ ज्ञान।
खिलौना माटी का……
नाक दिया मुखड़े की शोभा,
कर नित प्राणायाम।
खिलौना माटी का।
मुख दिया बोल ओ३म् नाम को,
संध्या कर सुबह शाम।
खिलौना माटी का…..
लाख मिटे इस माटी अन्दर,
राजा रंक मिटे इस अन्दर।
वहां रहा न नाम निशान,
खिलौना माटी का।।










