तूने हमें उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू
तूने हमें उत्पन्न किया
पालन कर रहा है तू
तुझसे ही पाते प्राण हम
दुखियों के कष्ट हरता है तू
तेरा महान् तेज है
छाया हुआ सभी स्थान
सृष्टि की वस्तु–वस्तु में
तू हो रहा है विद्यमान
तेरा ही धरते ध्यान हम
माँगते तेरी दया
ईश्वर हमारी बुद्धि को
श्रेष्ठ मार्ग पर चला
प्रभु !!!श्रेष्ठ मार्ग पर चला
प्रभु !!!श्रेष्ठ मार्ग पर चला
ओम् कार सबसे प्रथम
मन में कीजिये ध्यान
ओ३म् ही के जाप से
अवश्य मिले भगवान्
ओ३म् नाम भगवान् का
सर्वानन्द निधान
सब नामों में श्रेष्ठ है
करते वेद बखान
अनन्त गुण गण भूषित (1)
ओ३म्
शुद्ध ब्रह्म परात्पर
ओ३म्
शबल ब्रह्म सुनामित
ओ३म्
कालात्मक परमेश्वर
ओ३म्
प्रलायानन्तर सुस्थित
ओ३म्
इक्षित सृष्टि विधायक
ओ३म्
व्यापक यज्ञ प्रसारक
ओ३म्
लोकाखिल गतिदायक
ओ३म्
जगन्नियन्ता पालक
ओ३म्
जनता दु:ख प्रभञ्जक
ओ३म्
भक्त प्रिय सुखदायक
ओ३म्
सूर्यादिक द्युति धारक
ओ३म्
परम सहायक प्रियवर
ओ३म्
नित्यतृप्त सर्वाश्रय
ओ३म्
ज्ञान रूप सत्प्रेरक
ओ३म्
सकल द्रव्य व्यापक
ओ३म्
श्रोत्रादीन्द्रिय शक्तिद
ओ३म्
कर्माश्रित फलदायक
ओ३म्
अद्भुत तेजोबलयुत
ओ३म्
श्रेय:प्राप्ति सुसाधक
ओ३म्
हर्षित मति सन्दायक
ओ३म्
मातृप्रेम परिपोषक
ओ३म्
स्नेहादि पितृ पालक
ओ३म्
व्याह्यति लोक विभाजक
ओ३म्
सकल वृद्धि सिद्धि प्रद
ओ३म्
वेद चतुष्टय दायक
ओ३म्
अग्न्यादिक ऋषिपूजित
ओ३म्
साधन साध्य समुच्चय
ओ३म्
प्राण दक्ष सन्दायक
ओ३म्
इन्द्र बृहस्पति नामक
ओ३म्
ऋतु परिवर्तन कारण
ओ३म्
ऋतु मूलक हितदायक
ओ३म्
ज्ञान सूर्य विस्तारक
ओ३म्
सुरसम्पूजित सुरवर
ओ३म्
सत् सङ्कल्प प्रपूरक
ओ३म्
धर्माऽधर्म सुशिक्षक
ओ३म्
जन्मरहित जन्मप्रद
ओ३म्
देवादिक ऋण मोचक (38)
ओ३म्
मन वाणी के योग से
ओ३म् नाम उच्चार
भाव पूर्णानन्द में
भर भर प्रेम अपार
ओ३म् नाम का ध्यान धर
भीतर भर सद्भाव
सर्वरक्षक ओ३म् को
करो बनाकर लाम
क्लेश विमुक्ति विशेषण (39)
ओ३म्
स्नायुरहित सुख पूरक
ओ३म्
दैहिक रोग निवारक
ओ३म्
तनुपालक दीर्घायुद
ओ३म्
आत्मिक बल सन्दायक
ओ३म्
मानवलक्ष्य महाश्रय
ओ३म्
नित्य निरंजन निरूपम
ओ३म्
भव भय भञ्जन भेषज
ओ३म्
आर्त्तत्राण परायण
ओ३म्
अज्ञानादिक रिपुहर
ओ३म्
दारिद्रयादि विनाशक
ओ३म्
परमैश्वर्य सुदायक
ओ३म्
सर्वानन्द सुसाधक
ओ३म्
साम्राज्यार्क प्रसारक
ओ३म्
विश्वविनोदक विभुवर
ओ३म्
सत्बोधित हृदवर्धित
ओ३म्
निर्मल नायक शर्मद
ओ३म्
लोभादिक रिपु नाशक
ओ३म्
तेज:प्रद तेजोमय
ओ३म्
ओज:प्रद ओजोमय
ओ३म्
श्रद्धाप्रद श्रद्धामय
ओ३म्
रसवाहक सर्वेश्वर
ओ३म्
प्राण सृष्टि संचालक
ओ३म्
रस भेदक सम्वर्धक (62)
ओ३म्
ओ३म् दया का सिन्धु है
कर देगा उद्धार
ओ३म् ही कर साधना
वेदों के अनुसार
पाप निवारक मोक्षद (63)
ओ३म्
मृत्युरूप संशोधक
ओ३म्
चित्र विचित्र महातुथ
ओ३म्
सत्य सनातन धर्मद
ओ३म्
होमार्पित हुत भेदक
ओ३म्
सभ्यसभा-प्रतिभाप्रिय
ओ३म्
विस्तृत शान्ति विधायक
ओ३म्
वरुण प्रजापति प्रेरक
ओ३म्
स्थावर जङ्गम रक्षक
ओ३म्
विद्वज्जन मति प्रेरक
ओ३म्
विक्रम विष्णु विराट्
ओ३म्
दानरहित नर नाशक (74)
ओ३म्
ओ३म् ओ३म् जपते रहें
तन मन की सुध खोय
दे परे जो ओ३म् दे
ओ३म् उसी का होय
त्यागययुक्त नर भद्रद (75)
ओ३म्
मन्युरूप मन्युप्रद
ओ३म्
वीर्यरूप वीर्यप्रद
ओ३म्
सहनरूप सहदायक
ओ३म्
अचलरूप सञ्चालक
ओ३म्
रुद्र भीम भयवारक
ओ३म्
सज्जन सम्मत सौख्यद
ओ३म्
वर्ण चतुष्ट्य स्थापक
ओ३म्
सर्वन्यून सम्पूरक
ओ३म्
विद्वेषादिक भञ्जक
ओ३म्
सर्वमित्र सम्पादक
ओ३म्
सृष्टि-स्थिति-लय कारक (86)
ओ३म्
ओ३म् नाम है अमृत धारा
भीतर मिलता आनन्द अपारा
ओ३म् नाम को जिसने ध्याया
वांछित फल उसने ही पाया
सच्चा दाता सत्य स्वरूपा
उसकी महिमा विचित्र अनूपा
ओ३म् नाम है अपरम्पारा
ओ३म् नाम का हमें सहारा
काया मन्दिर सुन्दर तेरा
प्रति पर प्रभु करे बसेरा
सांज सबेरे करो स्नान
ओ३म् नाम से जोड़ो ध्यान
शोभ रहित नभ नामक (87)
ओ३म्
मङ्गल मूल मयोभव
ओ३म्
शंकर रूप मयस्कर
ओ३म्
वष्टु धियावसु रसवति
ओ३म्
सत्पथदर्श पुरोहित
ओ३म्
नाश निवारक स्वस्तिद
ओ३म्
सकल यज्ञ स्वीकारक
ओ३म्
उक्षित रक्षक शिक्षक
ओ३म्
विश्वरूप विश्वावसु
ओ३म्
विश्वमित्र वैश्वानर
ओ३म्
पुण्य पुरुतम पुरुष
ओ३म्
पाहि निरन्तर पूषण
ओ३म्
आह प्रवहण प्रभुवर
ओ३म्
अद्भुत मित्र कृपाकर
ओ३म्
मित्ररूप प्रतिपालक
ओ३म्
निश्चितमित्र निराश्रय
ओ३म्
अधमोद्धारक चिन्मय
ओ३म्
सत्य सुखात्मक सर्वद
ओ३म्
निर्गुण रूप निरामय
ओ३म्
आनन्दामृत वर्षक
ओ३म्
गणनायक गणपालक
ओ३म्
मर्माच्छादक विभुवर (108)
ओ३म्
अकार सत्य स्वरूप है
उकार चित् स्वरूप
मकार आनन्द मूल वह
सच्चिदानन्द अनूप
केवल सत् है प्रकृति
सत् चित् जीव स्वरूप
ओ३म् है आनन्दमय
एक सत्य स्वरूप
अकार कहाये सृजनहारा
उकार को बोलो पालनहारा
विसर्जन सदा करे मकारा
ये भी वेदों ने ओम् विस्तारा
बार बार नित ओ३म् ही गावा
जो मन होवे सो सुख पावा
ओ३म् नाम जो भी नर ध्यावे
अमृत पद को निश्चय पावे
अमृत पद को निश्चय पावे
अमृत पद को निश्चय पावे
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् कर्त्ता ओ३म् धर्ता
ओ३म् हर्ता ओ३म्
ओ३म् कर्त्ता ओ३म् धर्ता
ओ३म् हर्ता ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् ब्रह्मा ओ३म् विष्णु
ओ३म् शिव ओ३म्
ओ३म् ब्रह्मा ओ३म् विष्णु
ओ३म् शिव ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् धाता ओ३म् भ्राता
ओ३म् त्राता ओ३म्
ओ३म् धाता ओ३म् भ्राता
ओ३म् त्राता ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् ज्ञानम् ओ३म् ध्यानं
ओ३म् चिन्तयं ओ३म्
ओ३म् ज्ञानम् ओ३म् ध्यानं
ओ३म् चिन्तयं ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् पूतं ओ३म् सत्यं
ओ३म् मित्रं ओ३म्
ओ३म् पूतं ओ३म् सत्यं
ओ३म् मित्रं ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भू: ओ३म् भुव:
ओ३म् स्व: ओ३म्
ओ३म् भू: ओ३म् भुव:
ओ३म् स्व: ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् मह: ओ३म् जन:
ओ३म् तप: ओ३म्
ओ३म् मह: ओ३म् जन:
ओ३म् तप: ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् शम् ओ३म् खम्
ओ३म् ब्रह्म ओ३म्
ओ३म् शम् ओ३म् खम्
ओ३म् ब्रह्म ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् सूर्य ओ३म् चन्द्र
ओ३म् बुध ओ३म्
ओ३म् सूर्य ओ३म् चन्द्र
ओ३म् बुध ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् गुरु ओ३म् शुक्र
ओ३म् शनि ओ३म्
ओ३म् गुरु ओ३म् शुक्र
ओ३म् शनि ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् सत् ओ३म् चित्
ओ३म् आनन्द ओ३म्
ओ३म् सत् ओ३म् चित्
ओ३म् आनन्द ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
ओ३म् भज ओ३म् भज
ओ३म् भज ओ३म्
रचनाकार :- स्मृतिशेष डॉ विश्वामित्र जी गौरीबिदनूर निवासी
प्रस्तुति :- श्रीमती सुदर्शन मनचंदा जी, पूना और मण्डली
सम्पूर्ण-विस्तृत ओ३म् सङ्कीर्तन के लिए देखिये पुस्तक :- “भक्ति सत्सङ्ग कीर्तन” , सम्पादक :- पूज्य पण्डित सत्यानन्द जी वेदवागीश, पृष्ठ 92-93-94-95-96-97-98 (शब्द अर्थ सहित)
ओ३म् विषयक अधिक जानकारी के लिए, अर्थ को समझने/जानने के लिए सत्यार्थ प्रकाश अवश्य पढ़ें |
धन्यवाद
नमस्तेजी
सादर
विदुषामनुचर
विश्वप्रिय वेदानुरागी










