तुम्हीं ने अता की मुझे जिन्दगानी

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तुम्हीं ने अता की मुझे जिन्दगानी

तुम्हीं ने अता की मुझे जिन्दगानी
तेरी ही महिमा फिर भी न जानी
कर्जदार तेरी दया का हूँ इतना
जिसे मैं लौटाने के काबिल नहीं

तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ
मैं आ तो गया हूँ, मगर जानता हूँ
तेरे दर पे आने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का

ये माना कि दाता हो, तुम इस जहाँ के
मगर कैसे झोली फैलाऊँ मैं आ के
जो पहले दिया है वो, कुछ कम नहीं है
मैं ज्यादा उठाने के काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का, है बोझ इतना
जिसे मैं उठाने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का

जमाने की चाहत ने, खुद को मिटाया
तेरा नाम हरगिज, जुबां पे न आया
शर्मसार हूँ मैं, गुनाहगार हूँ मैं,
तुझे मुँह दिखाने के, काबिल नहीं हूँ
तेरी मेहरबानी का