तुम्हें कुछ सुनाने को जी चाहता है।

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तुम्हें कुछ सुनाने को जी चाहता है।

तुम्हें कुछ सुनाने को
जी चाहता है।
आज कुछ बताने को
जी चाहता है।। टेक ।।

हस्तिनापुर दरबार का
तुमको सुनाऊँ राग मैं।
अपना घर जो अपने
हाथों फूंककर गये आग में।।

ऋषियों के सिद्धान्त से
खेले दिखाऊँ फाग मैं।
मस्तक पर जो लग गया
कैसे छिपाऊँ दाग मैं।।

सभा लगी एक नारी को
नंगी नचाने के लिये।
योद्धा और विद्वान बैठें
सिर हिलाने के लिये ।।
सूरत छुपाने को जी चाहता है।।1।।

या सुनाऊं रागनी भारत के
युद्ध के बाद की ।
यौद्धा और विद्वान टूले
गोदी में प्रमाद की ।।

स्वार्थियों ने मत मतान्तरों
की शुरू बुनियाद की।
वाम मार्ग पर सुनाई थी
न वैदिक नाद की ।।

हवन में गौ मांस मदिरा
अन्डे रक्त रचने लगे।
धार्मिक सब ग्रन्थों में
अश्लीलता भरने लगे।
सत्यता जताने को
जी चाहता है।।2।।

या सुनाऊं भट्ट कुमारिल
आग में कैसे जला।
या सुनाऊं स्वामी शंकर
का हुआ मत खोखला ।।

या सुनाऊं ईसायत का
पौधा यहां कैसे पला।
या सुनाऊं मौहम्मदी
मत जगत में कैसे चला ।।
या सुनाऊं भूलें हिन्दुओं
की पछताने के लिये।
बैठा था भाई को जब
भाई मिटाने के लिये ।।
रोने रुलाने को जी चाहता है।।3।।

या सुनाऊं रागिनी दाहर की
भीषण हार की ।
या कहूँ कश्मीर में
इस्लाम के प्रचार की।।

गजनी के महमूद ने
क्यों लूट सत्रह बार की।
या सुनाऊं जयचन्द
पृथ्वीराज के परिवार की।।

हृदय विदारक दुर्घटनायें
छुपाये भी छुपती नहीं।
दिल में उठी कुछ भावनायें
रोकी भी रूकती नहीं।।
मिटने मिटाने को जी
चाहता है।।4।।

बिहार की घटना सुनो
या बरबादी चित्तोड की।
या सुनो घटना अमरसिंह
और अर्जुन गौड की ।।

या सुनोगे रागिनी गैरत
की और राठौड़ की।
मानसिंह की गद्दारी
प्रतापसिंह की मरोड़ की ।।

वतन को बरबाद करने
का जो ठेका ले गये।
आपस में लड़ने की
खातिर फूट सबको दे गये ।।
लड़ने लड़ाने को जी
चाहता है। ।5।।

कालीचन्द बंगाल की
या रायगढ़ के पतन की।
वीर बन्दा वैरागी गुरू
गोविन्दसिंह के मरण की।।

या सुनाऊं वीरबल अकबर
के उत्तर प्रश्न की।
या सुनाऊं रागिनी नलवा
के शत्रु दमन की।
जिसको गांवें काबुली
बच्चे डराने के लिये।
रह गई है दास्तां सुनने
सुनाने के लिए।।
गर्दन झुकाने को
जी चाहता है।।6

या सुनाऊं रागिनी अंग्रेजी
शासन काल की ।
पौने दो सौ साल तक
भर-भरके गाड़ी माल की।।

ले गये सब लूट कर
धनाड्य मां कंगाल की।
खून से लाखों जवानों के
यह भूमि लाल की।।

भारत के टुकड़े किये
लाखों मनुष्य मारे गये।
पाशविक व्यवहार में
मासूम संहारे गये।।
प्रश्न कुछ उठाने को
जी चाहता है।।7।।

या सुनाऊं रागिनी पंजाब
की कोई आजकी।
सरगम नागाओं की
या द्रविड की आवाज की ।।

केन्द्र की या प्रान्तों की
जायज की नाजायज की।
मत मतान्तरों की कहूँ या
सुनाऊं आर्य समाज की ।।

‘प्रेमी’ जिसने तुम बचाये
वह मिटाकर रख दिया।
जो मिटाने आया वह
सिर पर बिठाकर रख दिया।।
गैरत दिलाने को जी चाहता है।।8।।