तुम्हारे दिव्य दर्शन की
तुम्हारे दिव्य दर्शन की
मैं इच्छा ले के आया हूँ।
पिला दो प्रेम का अमृत
पिपासा लेके आया हूँ।
‘प्रकाशानन्द’ हो जाये
मेरी अन्धेरी कुटिया में,
तुम्हारा आसरा विश्वास
आशा लेके आया हूँ।
तुम्हारे………..।
रक्ष अनमोल लाने वाले,
लाते भेंट को तेरी।
मैं केवल आंसुओं की
मंजु माला लेके आया हूँ।
तुम्हारे……….।
जगत् के रंग सब फीके,
तू अपने रंग में रंग दे।
मैं अपना यह महाबदरंग
बाना लेके आया हूँ।
तुम्हारे………..।










