तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि सब सर झुकाते हैं।

0
24

प्रभु के गुणगान

(तर्ज-खिलौना जानकर मुझ को मेरा दिल तोड़े जाते हो)

तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि सब सर झुकाते हैं।
तुम्हीं से प्रेम करते हैं तुम्हारे गीत गाते हैं।
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि……….

१. सभी को आसरा तेरा तुम्हीं रक्षक व पालक हो।
तुम्हीं माता पिता सब के तुम्हीं दुनियाँ के मालिक हो।
सभी छोटे बड़े तुम से सदा वरदान पाते हैं।
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि………..

२. दिशाओं में तेरे जलवे तुम्हीं रंगीं नज़ारों में।
हृन्नाओं में तेरी हलचल चमक तेरी सितारों में।
घटाओं में तुम्हारे ही करिश्मे नज़र आते हैं।
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि…………

३. तेरे पाबंद हैं जग में अन्धेरे भी उजाले भी।
ग़रीबी और अमीरी भी गुदड़ियाँ भी दुशाले भी।
जहाँ इन्साफ़ होता है वो दर तेरा बताते हैं।
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि………..

४. बसा हर एक के दिल में तू फिर भी दूर है लेकिन।
कोई जाने न पहचाने बड़ा मशहूर है लेकिन।
निराली शान है तेरी ‘पथिक’ गा गा सुनाते हैं।
तुम्हारे दर पे ही योगी मुनि…………