तुम थे महान योगी (कृष्ण जन्माष्टमी) (तर्ज रहा गर्दिशों में हर दम)
तुम थे महान योगी
श्री कृष्ण जी हमारे।
हम कैसे भूल सकते
तप त्याग को तुम्हारे ।।
ग्वालों के साथ ऐसे लगते थे
तुम अलग से ।
जैसे हो चाँद तुम और
ग्वाल सब सितारे ।।
कितना कठोर व्रत था
ब्रह्मचर्यव्रत को पाला।
करके विवाह फिर भी थे
बारह वर्ष गुजारे ।।
अर्जुन को देख कायर
गीता का ज्ञान देकर।
अर्जुन की वीरता ने
दिखा दिये नजारे ।।
वसुदेव देवकी सुत धन्य है
तेरा श्रद्धा से सिर झुकाते
हम चरणों में जीवन । तुम्हारे ।।
श्री कृष्ण आचार्य संदीपन के आश्रम में ६४ दिन रहकर धनुर्वेद में पारंगत हुए तथा घोर आंगिरस के सान्निध्य में रहकर ब्रह्मविद्या प्राप्त किये।










