तुम इतने महान् बन आए।

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तुम इतने महान् बन आए।


तुम इतने महान् बन आए।
हम तुमको पहचान न पाए ।। टेक।
तुमने अमृत हमें पिलाया।
हमने तुमको जहर पिलाया।
फिर भी तुमने शाप न देकर,
वेद सुरभि से हम महकाए ।। १ ।।

तुमने ‘अपना वैभव यौवन ।
मानव हित में सदा लुटाया।
मानव ने पत्थर बरसाए,
तुमने उन पर रत्न लुटाए ।। २ ।।

आती हमको याद तुम्हारी ।
वे तप त्याग तितिक्षा प्यारे ।
कांटों से क्षत विक्षत होकर,
पुष्प मनोहर चुनकर लाए ।। ३ ।।

तुमने प्रेम भरे हृदय से ।
जिनके जीवन दीप जलाए।
प्राण तुम्हारे लेकर वे ही,
हंसे प्रथम पीछे पछताए ।। ४ ।।