तुम हो प्रभु चांद मैं हूं चकोरा।
तुम हो प्रभु चांद मैं हूं चकोरा।
तुम हो कमल फूल मैं रस का भौंरा।।
ज्योति तुम्हारी का मैं हूँ पतंगा।
आनन्द घन तुम हो मैं वन का मोरा ।।
जैसे है चुम्बक को लोहे से प्रीति।
आकर्षण करे मोहे लगातार तोरा।।
पानी बिना जैसे मीन ही व्याकुल।
ऐसे ही तड़पाये तुमरा बिछोरा ।।
इक बून्द जल का में प्यासा ह चातक ।
अमृत की करो वर्षा हरो ताप मोरा।।










