तू पिता तू ही माता
(तर्ज- ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन)
- तू पिता और तू ही माता तू सखा,
तू ही है भ्राता ऐ मेरे भगवान्।
निर्विकार निराकार तू
सर्वजगदाधार तू सर्वशक्तिमान्।
तू पिता और तू ही माता………..
१. अभय अनुपम और अनादि,
सृष्टि का करता है तू।
सर्व व्यापक न्यायकारी,
सकल दुःख हरता है तू।
तू कभी न जन्मता है,
न कभी मरता है तू ऐ मेरे भगवान् ।
तू पिता और तू ही माता…………
२. नियम से जग को चलाए,
सब का दाता भी है तू।
कर्मफल जो सब को देवे,
वह विधाता भी है तू।
तू स्वयं जग को बनाता
और मिटाता भी है तू ऐ मेरे भगवान् ।
तू पिता और तू ही माता…….
३. जीव हैं जग में अनेकों
सब का पालनहार तू।
सब को तेरा आसरा है
सबका प्राणाधार तू।
सब के सब दुखड़े मिटाए
सब से करता प्यार तू ऐ मेरे भगवान् ।
तू पिता और तू ही माता………..
४. करुणामय करुणा करो,
कि ध्याएँ तेरा नाम हम।
हवन सन्ध्या भजन गावें,
मिल के प्रातः शाम हम।
सत्य पथ पर पग बढ़ाएँ’,
पथिक’ आठों याम हम ऐ मेरे भगवान्।
तू पिता और तू ही माता……….










