तू इन्द्रियों को पाक बनाते हुए रे चल।
तू इन्द्रियों को पाक
बनाते हुए रे चल।
जीवन सुवास अपनी
फैलाते हुए रे चल ।।
उठ आगे बढ़ लक्ष्य
अपना ब्रह्म को बना ।।१।।
तू मृत्यु को ठोकर
लगाते हुए रे चल।
तू इन्द्रियों को पाक
बनाते हुए रे चल।।
सांसों का है आधार
विभूतियां इसमें सजा ।।२।।
स्तर स्तर झूम झूम
गाते हुए रे चल।
तू इन्द्रियों को पाक
बनाते हुए रे चल ।। ३ ।।










