तू है गुरुओं का गुरु, ध्यान तेरा ही धरूँ

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तू है गुरुओं का गुरु, ध्यान तेरा ही धरूँ

तू है गुरुओं का गुरु
ध्यान तेरा ही धरूँ
सत्य उपदेश तेरे
मन आत्मा में भरूँ


ज्ञान वेदों का अक्षय
देता है तू महिमामय
और बोध सृष्टि का
करता है तू ही शुरु
तू है गुरुओं का गुरु

पूर्ण ज्ञान देके भी तू
पूर्ण ही रहता है
स्रोत शतधारी
अक्षीयमाण वेद कहता है


उच्चतम गुरुओं का
उच्चतम अधिपति
महागुरु सर्वोपरि
अद्भुत आनन्द ज्योति निरंतर
पाते रहे देवगरू
तू है गुरुओं का गुरु

प्रभु को जो पाना है
जगाओ आत्मशक्ति
ढूँढ लो हृदय में उसको
और पाओ मुक्ति
आँखों से ना देखा जाए


वह है सर्वव्यापी
कण-कण में दिखे जादूगरी
ध्यान निरन्तर है गुरु मन्तर
पावो हृदय में अपने प्रभु
तू है गुरुओं का गुरु
ध्यान तेरा ही धरूँ


सत्य उपदेश तेरे
मन आत्मा में भरूँ
ज्ञान वेदों का अक्षय
देता है तू महिमामय
और बोध सृष्टि का
करता है तू ही शुरु
तू है गुरुओं का गुरु