तू चोला रंग दे बसंती मेरा
तू चोला रंग दे बसंती मेरा,
ओ दाता बिगड़ी बनाने वाले।
जलादे मन में तू ज्योति भगवन,
रवि शशी के बनाने वाले ।।
बनाया तूने ब्रह्मण्ड सारा,
गगन सितारों से जगमगाता ।
दिखादे मुझको वह मार्ग सच्चा,
ओ सच्चे रहबर कहलाने वाले ।।१।।
है बुलबुले के समान यह हस्ती,
मिटा दे झोंका अजल का पल में।
संभालेगा चप्पू अब तू ही भगवन,
है कर दी नैया तेरे हवाले।।२।।
रखा जिन्हें प्राणों से भी प्यारा,
कहे अभागा यह कब चलेगा।
न याद आया कभी तू भगवन,
लगाये किस्मत पे खुद ही ताले।।३।।
बुरा हूँ चाहे भला हूँ दाता,
हूँ फिर भी मैं प्रभु संतान तेरी।
न भेद समझा कुछ तेरा चातक,
है भेद तेरे सभी निराले ।।४।।
परमात्मा को न माल चाहिए,
न माला चाहिए।
वह तो मालामाल करने वाला है।










