तू बन जा भला सारी दुनियाँ भली

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तू बन जा भला सारी दुनियाँ भली

तू बन जा भला सारी दुनियाँ भली
खिला जो तेरा मनवा तो दुनियाँ खिली
घबराके ना दुःखो में रोते रहो पतझड
में भी सम्बल संजोते रहो पतझड़ से
निकलती वसंत की कलो ॥१॥

हर हालत में निशदिन चहकते रहो
फूलों सा बनके महकते रहो जिधर
तुम चलो साथ खुशबु चली ।।२।।

निज दीपक से दीपक जलाते रहो
धरा से अन्धेरा मिटाते रहो तू
चलना सुरेन्द्र सुपथ की गली ॥३॥