ओ३म् भज मेरे मन
(तर्ज-बात इतनी सी है कह दो कोई दीवानों से)
तोड़ कर दुनियाँ के बन्धन प्रभु दीवाना बन।
ओ३म् भज मेरे मन मेरे मन मेरे मन।
ओ३म् भज मेरे मन मेरे मन……….
१. भरे भण्डार हैं धन के इसी पर फूला है।
किया वादा जो है प्रभु से उसे क्यों भूला है।
बुलबुला पानी का है पगले यह तेरा जीवन।
ओ३म् भज मेरे मन मेरे मन…………
२. तेरी काया तेरे अपने तेरी वस्ती क्या है।
अरे मिट्टी के ओ पुतले तेरी हस्ती क्या है।
काल के पंजे में तू है एक पल का भोजन।
ओ३म् भज मेरे मन मेरे मन………..
३. समय गुज़रा हुआ फिर हाथ में न आएगा।
भजन कर ले नहीं तो बाद में पछताएगा।
दम ‘पथिक’ निकले तो फिर ढूँढेगा कोई साधन ।
ओ३म् भज मेरे मन मेरे मन………..










