ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
टप-टप बरखा नाद मन से जोड़ो
हल्की हल्की वर्षा की गुञ्जार
कानों को दिव्य संगीत से जोड़ो
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
पत्ती पत्ती को ना, कंकरी कंकरी में
जागा रोमांच और प्यार
घुल घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
चित्तचोर आया है ओट से देखे
छिप-छिप के सन्सार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
पर्दानशीं का खड़े बालों से पूछो
रोंगटों के पीछे-निहार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
बना लिया रोंगटे वालों को पर्दा
वहीं से रहा है निहार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
मेरी जान! प्रकृति-रोमांच है सदा
गाये पीछे से मोहन, मल्हार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
बस्ती बसा रखी बनैले वालों की
बंसी-सुरों में बहार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
सोम का सुरीला बह रहा है झरना
प्रकृति रस के संचार
घुल-घुल जाए प्रभु का उपकार
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
टप-टप बरखा नाद मन से जोड़ो
हल्की हल्की वर्षा की गुञ्जार
कानों को दिव्य संगीत से जोड़ो
ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार
ओ३म् आ सो॑म सुवा॒नो अद्रि॑भिस्ति॒रो वारा॑ण्य॒व्यया॑ ।
जनो॒ न पु॒रि च॒म्वो॑र्विश॒द्धरि॒: सदो॒ वने॑षु दधिषे ॥
ऋग्वेद 9/107/10
सामवेद 513, 1689
रचनाकार व स्वर :- पूज्य श्री ललित मोहन साहनी जी – मुम्बई










