था जग की आंख का तारा

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था जग की आंख का तारा

था जग की आंख का तारा,
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा।
सुधारक देश का प्यारा,
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा ।।

योगी महान आए
तो दयानन्द आये,
यायों कह दो दुखियों
के ‘भगवान आए,
मिटा दिया कष्ट आ सारा
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा ।।

यहां तो था अंधेरा,
था अविद्या का डेरा
पाखंड रूपी बादल भी
छाया था घनेरा किया
आकर के उजियारा,
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा।।

फिर सोया हंस जागा,
बना था जो कि कागा,
था गंदगी फिरोलता,
बेहोश था अभागा ।
उसे भव सिंधु से तारा,
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा ।।

सिंह कवि को जगाया,
सुपथ दिखलाया,
जो खोया अधिकार,
मान आन के दिलाया,
सुधारक देश का प्यारा,
ऋषि प्यारा ऋषि प्यारा ।।