था बुर्का भी स्वीकार किया
विश्व-परिवार में आप जैसी वीरांगनाओं को जन्म देने वाली स्वर्ग से सुंदर और गरिमामयी जननी-जन्मभूमि को समर्पित भावांजली➖
(आदम-पंथी शैतानों द्वारा शताब्दियों से मां-बहन-बेटियों के सतीत्व को कलंकित करके बुर्के की उम्रकैद में कैद करने वाले हलालाखोरों के संदर्भ में)
था बुर्का भी स्वीकार किया,
जन्नत किंतु तुम दे ना सके।
कहता था ईमां है सच्चा,
मैंने भी कर विश्वास लिया।
हूरों की तृष्णा में फंसकर,
तुमने क्यों मुझे तलाक़ दिया।
हलाले का शरिया दिखला,
मेरे भोले मन की निजता।
समता, ममता व शौरभ को,
बुर्के का कलंकित काल दिया।।
बेहतर है पक्का ईमां कर,
दो गज छुपकर, भू के अंदर।
फिरने ना देंगी, अब तुमको,
फसाद की खेती करते अब।
तेरा ना होगा मनुर्जन्म,
पा दण्ड भोग-योनियों में।
मेरे वश में है प्रणयकाल,
तेरा सारा ही गर्भकाल।
रह शांत भाव, देखा मैंने,
कब-कब भटका, ईमां खोकर।
रही मांग उजड़ती सिंदूरी,
कब तक यूं बनेंगे आतंकी।
हूरें थी जो भी, पाक-साफ,
रणचंडी बनकर, खड़ी आज।
इंतजार ना लंबा होता अब,
ले देख कहर, अब हूरों का।
ले देख खुदा ने भेजा है,
तेरा हिसाब चुकता करने।
ले न्याय दण्ड निज हाथों में,
दण्डित करने, उतरी भू पर।
सतवंती के शत को रखने,
भूलोक को स्वर्ग बनाएंगी।
जननी का गौरव, गाएंगी,
सिंदूर का मान बढ़ाएंगी।
हम जन्नत, की हैं कल्पतरु,
ईमां जन-मन में जगाएंगी।
ना होगी बंजर, अब जननी,
जन्नत जननी, को बनाएंगी।
शैतान का खतना, करके अब,
मां-बहन का शील बचाएंगी।
वर्षों से पढ़कर जो नमाज़,
फिर भी बनते हैं पत्थरबाज।
कोई ना बचने पाएगा,
ना बीच क़यामत आएगा।
ऐसा करके भीषण प्रहार,
कायनात से दफा, कराएंगी।
निश्चर मिट्टी में मिलाएंगी।।
अब है केवल, संकल्प एक,
स्वधर्म का पाठ पढ़ाएंगी।
जो हैं सच्चे ईमां वाले,
कागज़ उनका ही बनाएंगी।
बस जन्म वही ले पाएंगे,
सतयुग भू पर जो लाएंगे।
ना आतंकी, बन पाएंगे,
माता का मान बढ़ाएंगे।
शैतान को सबक सिखाएंगे।
धरती को स्वर्ग बनाएंगे,
भारत माता की जय💪
🙏वंदे मातरम्🙏
🌜कृण्वंतो🌞विश्वमार्यम् 🌛
विश्व-परिवार को निर्भय-निर्वैर विहार योग्य एक, नेक और श्रेष्ठ(आर्य) बनाएं।
🙏धन्यवाद🙏










