तेरो सारो ही गुलाबी रंग उड़ जाएगो।
तेरो सारो ही गुलाबी
रंग उड़ जाएगो।
सन्ध्या-हवन में
चित्त लगाले,
भवसागर से तर जायगी।
यह रंग है जैसे
कागज की पुड़िया,
पानी पड़त ही गल जायगी।
यह रंग है जैसे
ओस का पानी,
हवा चलत ही झड़ जायगो।
जिस तन का
अभिमान करत है,
एक दिन अघ्रि में
जल जायगो।
धन-दौलत और
माल खजाना,
सब धरा यहीं पर
रह जायगी।
वैदिक धर्म की
शरण में आजा,
पाप-पाखण्ड से
बच जायगी।










