तेरी ख़ातिर परमपिता ने यह संसार बनाया।

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तेरी ख़ातिर

(तर्ज- मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तिहारे आऊँ)

तेरी ख़ातिर परमपिता ने यह संसार बनाया।
कुल दुनियाँ का वैभव सारा तेरे नाम लगाया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने……

१. नभ पृथ्वी अग्नि जल वायु सूरज चाँद सितारे।
तेरे ही उपयोग में आते हैं सारे के सारे।
कभी न उसने तुझसे माँगा कीमत और किराया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने…….

२. घुमड़ घुमड़ आकाश में आती हैं घनघोर घटायें।
बिजली चमके बादल बरसे चलतीं मधुर हवायें।
सबने मिलकर जीने लायक वातावरण बनाया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने………

३. झरझर झरझर झरने झरते झरझर गीत सुनाते।
जंगल झाड़ी बाग़ बाग़ीचे मधुवन में लहराते ।
रंग बिरंगे फूल खिलाकर जीवन को महकाया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने……….

४. एक से बढ़कर एक प्रभु ने करतब खूब दिखाये।
पलक झपकते ही दुनियाँ में क्या से क्या हो जाये।
जादुगर की जादुगरी को कोई समझ न पाया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने…….

५. जलचर थलचर नभचर सारे हैं तेरे सहयोगी।
तू भी इनका साथी बन जा बहुत सफलता होगी।
मिलजुल करके ही रहने का सबको सबक सिखाया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने……..

६. सोना चाँदी हीरे मोती सब धन माल ख़ज़ाना।
सुबह रोशनी रात चाँदनी चारों ओर बिछाना।
‘पथिक’ जगत् के कण कण में है जगतपति की माया।
तेरी ख़ातिर परमपिता ने……..