तेरी दया परमात्मा मुझ पर बनी रही।
तेरी दया परमात्मा,
मुझ पर बनी रही।
यह मन तेरे हो ध्यान से,
निश दिन धनी रहे, ।।
तेरी दया ………
पल भर भी न रहूँ प्रभु,
चरणों से दूर मैं।
छाया आर्शीवाद की,
मुझ पर बनी रहे।।
तेरी दया ……
ऐसी कृपा करो माँ,
सदा सन्मार्ग पर चलूँ।
निष्काम सेवा में सदा,
श्रद्धा बनी रहे।।
तेरी दया …….
वैदिक धर्म के मर्म को,
समझें व समझाऊँ।
सबका कल्याण करने की,
कामना बनी रहे।।
तेरी दया ……
तेरे ही ओम नाम का,
अमृत पिया करूँ।
तब सोम रस से ही,
मेरी रसना सनी रहे।।
तेरी दया…….
निश्चय ही वह ब्रह्म निर्भय है,
जो उस ब्रह्म को जान लेता है,
वह ब्रह्म के समान निर्भय हो जाता है।










