तेरे पूजन को भगवान्

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तेरे पूजन को भगवान्

तेरे पूजन को भगवान्,
बना मन मंदिर आलीशान ।

तूने राजा रंक बनाए,
तूने भिक्षुक राज बिठाए।
तेरी लीला अपरम्पार बना
मन मन्दिर………

किसने देखी तेरी सूरत,
कौन बनावे तेरी मूरत।
तू निराकार सदा भगवान् बना
मन मंदिर…….

यह संसार है तेरा मन्दिर,
तूं रमा है इसके अन्दर धरते
ऋषि मुनि सब ध्यान बना
मन मन्दिर…….।

सागर तेरी शान बतावे,
पर्वत तेरी शोभा गावे।
हारे ऋषि मुनि सब आन-बना
मन मन्दिर……….

तू ही जल में तू ही थल में,
तू ही मन में तूही तन में।
तेरा रूप अनूप महान् बना
मन मन्दिर………