तेरे मिटेंगे संकट सारे

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तेरे मिटेंगे संकट सारे

तेरे मिटेंगे संकट सारे,
नित ओम् भजन कर प्यारे ।। टेका।
नित…….

ओम् ईश का श्रेष्ठ नाम है,
जीव मात्र हित मुख्य काम है।
जनम मरण से टारे ।।१।।
नित ओम्……….।।

जग के अणु अणु के अन्दर,
व्यापक ओम् स्वयं विश्वम्भर ।
हम नहीं ओम् से न्यारे ।।२।।
नित ओम्…….

प्राणो का भी प्राणा ओम् है,
सुख दाता भगवान ओम् है ।
ओम् विश्व को, धारे ।।३।।
नित ओम्……

रक्षक वह दिन रात ओम् है,
तात-मात गुरु भ्रात ओम् है ।
ओम् ही सखा, हमारे ।।४।।
नित ओम्……..

जग में सब स्वार्थ का नाता,
कुटुम्ब कबीला साथ न आता ।
जब यम प्राण, निकारे ।।५।।
नित ओम्……….।।

पाप पुण्य ही साथ चलेगा,
ओम् भक्ति बिन हाथ मलेगा ।
चौरासी झख मारे ।।६।।
नित ओम्……..

यही वेद शास्त्रों ने गाया,
ऋषि मुनियों ने यही बताया ।
ओम् ही सबको तारे ।।७।।
नित ओम्……….।।

मुक्ति द्वार हाथ अब आया,
दुर्लभ ‘व्यास’ मनुज तन पाया ।
क्यों ना जन्म सुधारे ।।८।।
नित ओम्……..।।

व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयामाप्नोति दक्षिणाम् ।