तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
सारे जग का पिता और माता है तू
लेने वाले सभी, एक दाता है तू
कारीगर-आदमी देवे सर को झुका
अपनी कारीगरी जब दिखाता है तू
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तेरी रहमत का कोई ठिकाना नहीं
भेद तेरा किसी ने भी जाना नहीं
तेरी ताकत के कोई बराबर नहीं
कौन है वो तुझे जिसने जाना नहीं
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
अपनी गम की कहानी सुनायें कहाँ
छोड़ कर तेरा दर और जायें कहाँ
अपने चरणों में हमको जगह दीजिये (1)
और जग में ठिकाना बनाये कहाँ
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
यूँ तो दुनिया में कितने सिकन्दर हुए
तेज बल ज्ञान के जो समन्दर हुए
एक से एक माना के बढ़ कर हुए
पर सभी तेरी सीमा के अन्दर हुए
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
हम तुम्हारे “पथिक” हैं तुम्हारे प्रभु
और तुम्हीं हो हमारे सहारे प्रभु
हम तुम्हीं से सदा प्यार करते रहें
बस यही एक विनती है प्यारे प्रभु
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
तुम ही रक्षक हो दुनिया में सब से बड़े
तेरे दर पे प्रभु जी हम आन खड़े
रचनाकार :- पूज्य पण्डित श्री सत्यपाल जी “पथिक”
स्वर :- श्री दिनेश जी आर्य पथिक सम्पर्क
सूत्र :- 9855098530 9872955841










